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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

मेरे दोस्त की गर्लफ़्रेंड की चूत- 2


दोस्त Xxx कहानिया लिखने की शृंखला में मैं इस कहानी का दूसरा भाग लिख रहा हूँ कि किस तरह से मेरे दोस्त की एक्स गर्लफ्रेंड ने मेरे साथ ओरल सेक्स के बाद गंदे सेक्स का मजा लिया.

कहानी के पहले भाग
मेरे दोस्त की गर्म गर्लफ़्रेंड
में आपने पढ़ा कि कॉलेज में मुझे एक लड़की बहुत पसन्द आयी पर वह मेरे सीनियर की गर्लफ्रेंड निकली. उससे मेरी दोस्ती हो गयी थी, और कुछ नहीं!
पढाई पूरी होने के बाद उनका इरादा शादी करने का था.
कई साल बाद मेरी मुलाकात उसी लड़की हुई तो उसने बताया कि उनका अलगाव हो गया था.
अब मुझे कुछ आस जगी और मैंने उससे समीपता बढ़ा ली.
एक रात वह मेरे साथ मेरे एक दोस्त के रूम पर थी और हम चुदाई की शुरुआत कर चुके थे.

अब आगे दोस्त Xxx कहानिया:

ज्योति ने मेरे लण्ड को यूँ चित किया कि वह उसकी चूत में घुस नहीं पा रहा था.
ज्योति उस पर ऐसे बैठी थी कि उसकी चूत की दरार में मेरा लण्ड रगड़ रहा था.
और फिर उसने ख़ुद को आगे पीछे करना शुरू किया।

अब भी वह मुझे अपने चूचों पे कोई ख़ास हाथ नहीं चलाने दे रही थी।
शायद इसीलिए उसके चूचे एकदम कड़क थे और उनमें ज़रा भी ढलक नहीं थी कि वह किसी को अपने चूचे छेड़ने ही नहीं देती थी।

ख़ैर मैंने नीचे पड़े अपने पैर थोड़े मोड़े जिससे ज्योति थोड़ी ऊपर हो जाए और मेरा लण्ड लेटे से खड़ा हो सके ताकि मैं ज्योति की चूत पेल सकूँ.
पर सच यही था कि मैं उसको नहीं बल्कि वह मुझे पेल रही थी।

जैसे ही मैंने थोड़ा जुगाड़ करके अपना लण्ड उसकी चूत में पेलना चाहा तो वह मुझे घूर के देखने लगी और बोली- जैसे मैं चाहूँगी, वैसे खेलूँगी … तू सिर्फ़ मज़े कर!

मैं- ये कैसे मज़े हैं? चूत में पेल नहीं सकता, चूचे मैं पी नहीं सकता?
ज्योति- मेरे साथ सेक्स ऐसे ही होता है। तेरा माल भी निकालूँगी और चूत भी तुझे पिलाऊँगी पर अभी तू बस लेट के मज़े ले!

मैं- मुझे नहीं पता था कि तू मुझे चोदने वाली है। आज तो तूने एक अलग अनुभव करा दिया जानू!
ज्योति- ये तो मैं सिर्फ़ शुरू हुई हूँ … तू देखता रह, अभी तो बहुत कुछ बाक़ी है!

मैं- बस एक बार इसको चूत में डाल के गीला कर दे … उसके बाद जो चाहे करती रहना!

ज्योति- गीला तो कई बार कर दिया तेरा … कहे तो दोबारा मुँह में डालूँ?
इतना कह कर ज्योति ठहाके लगा के हंसने लगी।

मैं उसकी हंसी से समझ गया था कि वह जानती है उसकी ब्लो जॉब को सम्भालना हर किसी के बस की बात नहीं।

मैं आँख मारते हुए- जितनी बार चाहे चूस ले पर एक बार इसको अपने चूत रस से गीला कर दे बस!

ज्योति शरारत भरी नज़र से देखती हुई- चल करती हूँ … पर उससे पहले तू मेरी चूत पी!
और इतना कह कर वह मेरे मुँह पर चढ़ के बैठकर अपनी चूत को आगे पीछे सरकाने लगी।

मैं कुछ और करने की स्थिति में नहीं था तो मैंने भी जीभ निकाल के उसकी चूत को चाटना शुरू किया।
पर अब इसको सबक़ सिखाना बड़ा ज़रूरी था।

ये जाने कब लौड़ा निगलने के मूड में थी पर मुझे अभी चूत पेलनी थी और वह भी जल्दी … वरना मेरे आँडों में दर्द शुरू होना तय था।

मैंने अपने हाथों को ज्योति की पीठ पर फिराना शुरू किया और नीचे से उसकी चूत को चाटता, चूमता रहा।
रह रह कर मैं उसकी चूत में जीभ भी डाल देता।
मौक़ा लगता तो उसकी चूत का मर्दन अपनी उंगली से भी कर देता पर वह चूत में उंगली डालने नहीं दे रही थी … बहुत ज़िद्दी थी वह!

और इसलिए मेरा मज़ा और ज़्यादा होता जा रहा था.
क्यूँकि दोस्तो, जो मज़ा अड़ियल चूत को पेलने में है, वह सीधी साधी चूत कभी नहीं दे सकती।

मेरा लण्ड तो फटने को तैयार था और मुझे कैसे भी करके जल्दी से मुन्ना का जुगाड़ सेट करना ही था।

मैं नीचे ज्योति की चूत पीता रहा और ऊपर उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा।
ज्योति का ग़ुलाम होने में मुझे एक अलग आनन्द आ रहा था.
और मेरा जोश तो इतना चढ़ा हुआ था कि शायद उसकी चूत को चोद चोद के आज ही भोसड़ा बना सकता था।

मुझे यहाँ ज्योति को कुछ वापस करने का मौक़ा हाथ आया था तो मैंने उसको बिना गँवाए सही मौक़ा पाकर अपना अंगूठा ज्योति की गांड में पेल दिया।
पेलना भी ऐसा वैसा नहीं बल्कि पूरा अंगूठा … जिसकी उसको आशा भी नहीं थी।

इससे पहले वह कुछ करती, उसकी चूत से झरना बह गया और इतना बहा, इतना बहा जैसे मुझे स्नान करा के ही रुकेगा।

मुझसे जितना पिया गया, मैंने पी लिया.
पर ज्योति की चूत रुकने का नाम नहीं ले रही थी।

ज्योति के कामरस के साथ उसका पेशाब भी बहना शुरू हो गया था.
और वह मुस्कुराती हुई, उन्माद में कराहती हुई, सिसकारती हुई मेरे ऊपर उस सुनहरे झरने की बरसात करते हुए नीचे को सरकनी शुरू हुई।

थोड़ी ही देर में ज्योति मेरे मुँह से शुरू होकर मुझे अपने पेशाब से पूरा गीला कर चुकी थी.
और सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि वह इतना बही कि मेरे साथ साथ झूले की गद्दी भी गीली हो चुकी थी और ज्योति मेरे ऊपर बैठी सीत्कार रही थी।

पूरे माहौल में एक अलग गंध फैली थी.

अब कैसे भी मुझे अपने लण्ड को थोड़ी राहत देनी थी जो सिर्फ़ और सिर्फ़ ज्योति की चूत की भट्टी की आग में तपकर ही सम्भव था।

मैंने ज्योति के कूल्हों के नीचे हाथ रख उसको थोड़ा और नीचे को सरकाया.
और जब तक इसका अहसास ज्योति को होता, मैंने नीचे से एक ज़ोरदार धक्के के साथ अपने लण्ड को ज्योति की चूत में पेल दिया।

इसके लिए वह बिल्कुल तैयार नहीं थी.
पर उसकी चूत ने अभी झरना बहाया था और वह इतनी गीली थी कि बिना किसी रुकावट के मेरा लण्ड उसकी चूत में खलबली मचाने के लिए उतर चुका था।

ज्योति के मुँह से एक तेज चींख निकली और मेरा लण्ड उसकी चूत में जाकर जैसे वहीं अटक गया।
उसकी चूत बहुत ज़्यादा टाइट थी और इतनी गर्म दोस्तो … जैसे चूत ना हुई कोई भट्टी हो गयी।

ज्योति का पहला रीऐक्शन ऐसा था कि वह मुझे ग़ुस्से से देख रही थी और उसने झटके से मेरे लण्ड से अलग होने का प्रयास भी किया.

पर मैं तब तक अपनी पकड़ बना चुका था और मैंने उसे अपने लण्ड पर बनाए रखने के साथ थोड़ी कोशिश करके ख़ुद उठ कर बैठा हो गया।

अब हम ऐसी पोज़िशन में थे कि ज्योति मेरी गोद में मेरा लण्ड अपनी चूत में लिए बैठी हो.
पर वह पूरा प्रयास कर रही थी मेरे से अलग होने के लिए।

मैंने ज्योति को कस के थामे रखा और अपने होंठों को उसके होंठ पर रख उसके होंठों के रस को पीने लगा।
मेरे होंठों पर से ज्योति को ख़ुद के रस और पेशाब का स्वाद ज़रूर आया होगा.
और उसके बाद मुझे अचंभित करने को ज्योति ने मेरे होंठों के बाद मेरे पूरे मुँह को चाटा जैसे वह अपने ख़ुद के कामरस और पेशाब के स्वाद का आनन्द ले रही हो।

इतना सब होने पर भी वह मेरे लण्ड के लिए सहज नहीं थी … यह मैं अच्छे से महसूस कर सकता था।
मेरा लण्ड अपनी मनचाही चूत में तो पहुँच गया था और मैं नीचे से हल्का घर्षण भी कर रहा था.

पर अब एक आख़री दाव बाक़ी था.
और वह था ज्योति को अपने नीचे लिटा कर उसकी पलंगतोड़ चुदाई करना।

अपने ही कामरस और पेशाब के मिश्रण के स्वाद को चखकर ज्योति कुछ ज़्यादा ही रोमांचित थी.
उसके इस सुख को तब विराम मिला जब मैंने उसको पलट के पलंग पे पलटा और ख़ुद उसके ऊपर आकर अपने लण्ड को दोबारा उसकी चूत में पेल दिया।

ज्योति को कोई प्रतिक्रिया करने का मौक़ा नहीं मिला.
मैं दोबारा उसकी संकुचित चूत में अपना लण्ड उतार चुका था।

उसने अपने पैरों को टाइट कर रखा था और इसी कारण मैं उसकी चुदाई नहीं कर सकता था.
तो मैंने उसके चूचों का मर्दन करने को उसकी छाती पे जैसे ही हाथ रखे कि वह तिलमिला उठी और ग़ुस्से में मुझे गालियाँ देने लगी।

ज्योति- तुझे समझ नहीं आता कि मुझे अपने बूब्स पे किसी के हाथ पसंद नहीं।
मैं- समझ तो सब आता है पर तू शायद अभी तक नहीं समझी कि घोड़े को चोदना नहीं सिखाते।

ज्योति झुंझलाती हुई- मैं सब कर रही थी ना, फिर तूने समझदारी क्यूँ दिखाई?
मैं मुस्कुराते हुए- कॉलेज के दिनों से तुझे चोदने की तमन्ना थी मेरी जान! पर तू ध्रुव के लण्ड के आगे कभी बढ़ी ही नहीं … और आज हाथ आयी तो भी अपने हिसाब से चुदेगी … वह सब अगली बार के लिए रख और अब अपने पैर ढीले छोड़!
ज्योति- तू पहले मेरे बूब्स पे से हाथ हटा!

मैं- जब सब कुछ कर सकता हूँ तो बूब्स से क्यूँ नहीं खेलने देती हो जान?

ज्योति झुंझलाती हुई- क्यूँकि बूब्स ढलक जाते हैं और वह मुझे पसंद नहीं। तू बस बूब्स ना छेड़!
और इतना कह कर उसने मेरे हाथ झटक के हटा दिए.

मैं हल्के हल्के लण्ड हिलाते हुए- जैसे चाहे वैसे कर … पर पहले अपनी पैर ढीले छोड़ … नहीं छूने तेरे चूचे अगर तुझे पसंद नहीं!

और फिर ज्योति ने अपने पैर ढीले छोड़ के पूर्ण समर्पण सा कर दिया।

इसके बाद मैंने धीरे धीरे अपनी गति बढ़ाई और उसके साथ ही ज्योति के मुँह से निकलती आहें भी बढ़ती चली गयी।

ज्योति चोदने को एक बेहतरीन सामान थी और उसको अच्छे से पता था कि उसका पार्टनर कैसे उत्तेजित होगा.
उसने अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए जिससे मुझे दर्द होने लगा.

उससे अपना ध्यान हटाने को मैंने ज्योति को और ज़्यादा तेज़ी से चोदना शुरू किया।
मैं ज्योति पर कुछ ऐसे छाया हुआ था जैसे कोई मेंढक बैठा हो और ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा था।

ज्योति भी अब तक अपने पैरों को पूरा हवा में उठा चुकी थी और मेरी हर ठाप का जवाब अपनी गांड हिला के दे रही थी।

मेरा लण्ड ज्योति की बच्चेदानी के अंदर तक जा रहा था और हर धक्के के साथ उसकी एक कराह भी निकल रही थी जो मेरे कानों को एक असीम सुख दे रही थी।

कोई 10-12 मिनट की चुदाई के बाद ज्योति थोड़ी अकड़ने लगी.
मैं समझ गया कि ज्योति एक बार फिर से स्खलित होने वाली है.

तो मैंने ज्योति की चूत में लण्ड को पूरा अंदर बाहर करना शुरू किया जिससे उसको धक्कों का पूरा प्रहार महसूस हो और आनन्द भी भरपूर आए।

इसके बाद थोड़े ही धक्के ज्योति से झेले गए और वह चिल्लाती हुई झड़ने लगी.
पर अचम्भे की बात यह थी कि इस बार भी ज्योति अपने पेशाब को नहीं रोक पायी और उसने मेरे लण्ड के उसकी चूत में होने के बावजूद पेशाब कर दिया।

यह अहसास भी बहुत सुखद था क्यूँकि उसके मूत्र छिद्र से निकलता पेशाब बहुत गर्म था और मेरे लण्ड को सिकाई सी होती महसूस हो रही थी।
वह मुझे पहले ही पूरा गीला कर चुकी थी और कमरा पेशाब की महक मार रहा था.

अब बचा हुआ पलंग भी उसके पेशाब से गीला हो चुका था।
मैंने उसकी चुदाई चालू रखी.

पर अब ज्योति बिल्कुल थक चुकी थी और उसके चेहरे से यह साफ़ ज़ाहिर हो रहा था।

थोड़ी ही देर में उसने ख़ुद पूछ लिया- और कितनी देर चोदेगा? इंसान का लण्ड है या गधे का?
मैं गर्व से- लण्ड तो मेरा ही है पर किसी घोड़े से कम नहीं। अभी थोड़ा समय लगेगा. यह लम्बी रेस का घोड़ा है कोई ऐसा वैसा घोड़ा नहीं!

ज्योति थकावट भरी आवाज़ में- थक गयी हूँ यार … और पेट में भी दर्द होने लगा है. अब तो सूरज भी निकल आया पर तेरा नहीं हुआ!

मैं- तूने हमेशा गधे का लण्ड ही लिया है इसलिए तुझे हॉर्सपावर का नहीं पता। थोड़ी देर सब्र कर, हो जाएगा। वरना रुक जाता हूँ पर फिर शुरू से शुरू करना पड़ेगा.
ज्योति अचम्भे में- फिर से मतलब? तू दोबारा भी करेगा क्या?

मैं- अभी तो बस शुरू हुआ है। और फिर तेरी छुट्टी भी है आज … 3-4 राउंड तो बनते हैं जानू! बस ये बिस्तर साफ़ करना पड़ेगा। ये जो तूने गंद मचाया है ना, मैं इसको बहुत देर तक बर्दाश्त नहीं कर सकता।

ज्योति- बर्दाश्त नहीं कर सकता तो हट मेरे ऊपर से! यही तो मुझे सेक्स में सबसे अच्छा लगता है। जब मैंने तेरे ऊपर शू-शू किया … एक अलग सुकून मिला मेरी रूह को!
और इतना कह कर ज्योति ठहाके लगा के हंसने लगी.

मैं- सिर्फ़ मेरे ऊपर नहीं बल्कि मेरे मुँह पर भी … तूने मेरे मुँह पर बैठकर पेशाब करना शुरू किया था पागल … तेरा तो सारा सुकून निकाल देना है मैंने आज … मुझे ध्रुव मत समझना। तेरी चूत इतनी टाइट तभी है जब उसने तुझे ठीक से नहीं चोदा। मैं होता तो अब तक तेरे सारे अंजर पंजर ढीले कर चुका होता. और तेरे चूचे, ये तो पक्का ढलक गए होते … तेरी भाषा में!

और फिर मैंने धक्कों की गति एक बार फिर बढ़ा दी.

चुदाई होते हुए बहुत देर हो चुकी थी और फ़ोरप्ले को जोड़ें तो क़रीब 3 घंटों से हम एक दूसरे के साथ लगे पड़े थे।

कमरे में फैली महक के कारण भी मेरा लण्ड अपने जोश को सह नहीं पा रहा था तो मैंने ज्योति की चूत से पूरा लण्ड बाहर निकाल के दोबारा पेलना शुरू किया.
जिससे वह थोड़ा ड्राई हो जाए और घर्षण के कारण जल्दी झड़ जाए।

मैंने ज्योति को भी थोड़ा ऐक्टिव होने को कहा कि अगर वह चाहती है मैं जल्दी काम करके हटूँ तो उसको मेरा साथ देना होगा वरना मैं उसको यूँ ही 2-3 घंटों तक और पेल सकता हूँ।

ज्योति मेरी बात सुन कर फिर से मेरी पीठ पे हाथ फेरने लगी और मेरी तृप्ति के लिए उसने मेरे एक हाथ को अपने चूचे पर रख दिया।

मैंने भी उसका मान रखते हुए उसके चूचे को हल्के हल्के सहलाना शुरू किया और नीचे धक्कों की गति को बढ़ाते हुए ज्योति की चूत चुदाई चालू रखी।

थोड़ी ही देर में मेरा लावा बनता महसूस होने लगा था और मेरा लण्ड भी पहले से ज़्यादा फूल चुका था।

ज्योति की ताबड़तोड़ चुदाई जारी थी और बहुत देर से चुदाई चलने के कारण मेरे पेट में भी दर्द होने लगा था।

उसकी चूत बहुत टाइट होने के कारण मेरे लण्ड का छिलना तो स्वाभाविक ही था।

मैंने ज्योति को कहा कि वह मुझे थोड़ा किस करे और थोड़ा काटे जिससे मुझे जल्दी डिस्चार्ज होने की प्रेरणा मिलेगी।

ज्योति ने मुझे कहा कि मैं उसकी चूत में बिल्कुल स्खलित ना होऊं क्यूंकि उसका फर्टाइल समय चल रहा है और उसको बच्चा ठहरने का डर है।

इस बात को मैंने नज़रअंदाज़ किया क्यूंकि एक बार चूत में लण्ड जाने के बाद माल तो उसी में खाली करके मन भरता है, वरना कुछ अधूरा सा महसूस होता रहता है।

और ज्योति के ना चाहते हुए भी उसकी चूत को भरने की सोच के चलते थोड़ी ही देर में मैंने एक के बाद एक जाने कितनी पिचकारी मार के ज्योति की चूत को अपने वीर्य से भर दिया।

ज्योति ने मेरे वीर्य को जैसे ही अपनी चूत में महसूस किया, उसने मुझे गुस्से से देखा पर इसके बावजूद भी वह मेरे लण्ड की गर्मी के आगे ख़ुद को नहीं रोक सकी और एक बार फिर ज्योति ने अपने कामरस से मेरे लण्ड को तृप्त किया.
पर इस बार भी वह अपने पेशाब को नहीं रोक पायी और अपनी आहों के साथ उसने पूरा झरना बहाया.

हम दोनों बहुत थक चुके थे और एक दूसरे पे ऐसे ही पड़े रहते अगर उसके पेशाब की महक कमरे में ना फैली होती.
जिसके कारण मुझे ज्योति के ऊपर से हटना पड़ा और बाथरूम में जाकर सबसे पहले मैंने गर्म पानी से स्नान किया।

मेरे पीछे पीछे ज्योति भी बाथरूम में आ गयी और उसने भी मेरे साथ स्नान किया।

मैं शॉवर चला कर उसके नीचे बैठा था और ज्योति मेरी गोद में आ कर बैठ गयी जिसके कारण मेरा लण्ड फिर से सिर उठाने लगा।

जैसे ही मेरा लण्ड ज्योति ने अपनी चूत पर महसूस किया, उसने फिर से पेशाब कर मेरे लण्ड को अपने पेशाब से नहला दिया और मुझे समझ आया कि जब वह सेक्स करती है तो उसको अपने शू-शू पे कंट्रोल नहीं रहता।

बाद में ज्योति ने ही इस बात की पुष्टि की और बताया कि इसीलिए वह सब काम कर रही थी पर लण्ड नहीं पेलने दे रही थी क्यूँकि उसको नहीं पता था कि मेरा रीऐक्शन क्या होगा।

मैंने ज्योति को बताया कि अगर वह चाहे तो हम दोबारा सेक्स कर सकते हैं. पर इस बार हमें सेक्स करने से पहले बिस्तर पर कोई पॉली बिछानी होगी.
जिसे सुन कर ज्योति ने मेरा कान पकड़ लिया और खिलखिला कर हंसने लगी।

इसके बाद हमने उस दिन शाम तक 3 बार सेक्स किया और उसके अलावा भी कई बार सेक्स किया.

और फिर ज्योति की शादी तय हो गयी और अब हमारी कभी कभी फ़ोन पर बात हो जाती है. पर सिर्फ़ दोस्तों की तरह!

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