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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

मस्त लड़की ने मुझे बनाया अपना शूगर डैडी- 2


शूगर डैडी एंड हॉट गर्ल की कहानी में एक लड़की है 20-22 साल की. एक पुरुष है उससे दोगुणी उम्र का. दोनों में दोस्ती हुई और दोनों आपस में सेक्स करना चाहते हैं.

फ्रेंड्स, मैं राहुल श्रीवास्तव एक बार पुन: आपकी सेवा में हाजिर हूँ.
नई जनरेशन की कमसिन लड़की आदिरा मेरे साथ किस तरह से सेक्स में बढ़ रही थी, यह आपने कहानी के पिछले भाग
बेटी की उम्र की लड़की को चोदने की तमन्ना
में पढ़ा था.

अब आगे शूगर डैडी एंड हॉट गर्ल कहानी:

एक दिन ऐसे ही सोशल मीडिया के चैट के दौरान उसने बताया कि मेरी रूममेट्स आपको मेरा शुगर डैडी समझती हैं.
मैं- शुगर डैडी? ये क्या होता है?

आदिरा- मेरे जैसी कम उम्र की लड़की का उससे उम्र में काफी बड़ा … या ये कहें कि उस लड़की से दोगुनी उम्र के पुरुष मित्र को शुगर डैडी कहते हैं … और वह पुरुष मित्र उस लड़की की केयर करता है. उसे गिफ्ट देता है, मदद करता हो और बदले में वह लड़की उसके साथ समय बिताती है. वह उस लड़की के साथ … करता है इत्यादि.

मैं- उसके साथ क्या?
आदिरा- अरे डैडी आप समझो ना!

जैसे ही उसने मुझे अंकल की जगह डैडी कहा तो मेरे दिमाग की घंटी बजी मतलब शारीरिक सम्बन्ध चुदाई सम्भोग!

मैं- ओह्ह्ह.

यह जानकारी मेरे लिए नई थी.
सच में क्या जनरेशन है.

मैं- पर मैं तो तुम्हारा मित्र नहीं हूँ और ना ही आज तक मैंने तुमको कोई गिफ्ट दिया और ना ही कोई गलत हरकत की?
आदिरा- हां पर मदद तो की ना … इतनी अच्छी इंटर्न दिलवा कर. वैसा वे समझती हैं तो समझती रहें … मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है!

इन सब बातों के बाद मैंने इस पर गूगल से और ज्ञान प्राप्त किया तो वहां से पता चला कि यंग लड़कियां जिस किसी अमीर आदमी से सेक्स या चुदाई के बदले अपनी भौतिक जरूरत को पूरा करती हैं, वे उस अमीर मर्द को शुगर डैडी कहती हैं.

शायद हमारे समय के फ्रेंड्स विद बेनिफिट का बदला हुआ स्वरूप है या प्रचलन विदेशों में प्रचलित है जहां सेक्स को वर्जित फल नहीं माना जाता है … और तो और … पाश्चात्य देशों में लड़कियां अपनी वर्जीनिटी का ऑक्शन भी करती हैं.
इन देशों में लड़की के पहली बार माहवारी आने बाकायदा सेलिब्रेशन भी किया जाता है.
लड़की की पहली डेट पर जाने में पेरेंट्स भी सपोर्ट करते हैं.

पर यह उनका कल्चर है; हमारी भारतीय सभ्यता में सम्भव नहीं है.

इस विषय में कई मूवीज/सीरीज़ भी अलग अलग ओटीटी पर भी उपलब्ध हैं … जो काफी एडल्ट हैं.
पर ओटीटी प्लेटफार्म के चलते टीनएज सीरीज़ का हमारे समाज में भी काफी असर हुआ है.

जनरेशन Z और ALFA ने इस पाश्चात्य सभ्यता को तेज़ी से अपनाया है.

अब तो आदिरा ने मुझको अपना शुगर डैडी मान ही लिया था और मुझे डैडी कहना भी शुरू कर दिया था.
मैंने भी उसे नहीं रोका था.

इसका यह अर्थ निकल आया कि हमारे संबंधों को एक नयी दिशा ही मिल गई थी.

मुझको लगा कि वह दिन दूर नहीं जब आदिरा मेरे लंड को चूस रही होगी.

ऐसा सोच कर ही मेरे लंड में हरकत होने लगती थी … और इस हरकत की वजह से सब कुछ मेरी बीवी को झेलना पड़ता था.

मतलब उस रात बीवी की धमाकेदार चुदाई होती थी.
अब तकरीबन ऐसा रोज़ होने लगा था.
मैं आदिरा समझ कर अपनी बीवी की चूत का भोसड़ा बनाने पर तुल जाता था.

जबकि आदिरा से मैंने अभी तक ऐसी कोई बात नहीं की थी जिससे उसको लगे कि मैं उसको चोदना चाहता हूँ.
पर लड़की थी तो उसको अंदाज़ा तो हो ही गया था और उसने खुद से मुझे डैडी कह कर अपना मन बना भी लिया था.

अब हमारी मुलाकातें भी कुछ ज्यादा होने लगी थीं.
इससे मुझे यह पता चल गया कि उसे फ्री लाइफ पसंद है. वेस्टर्न ड्रेस पसंद है.
सेक्स सम्भोग में संकोच नहीं था, उसके हिसाब से यदि उसको वह पार्टनर पसंद है … तो उसके साथ सम्भोग में कोई बुराई नहीं है.

इसी विचार के साथ मेरी यह सोच भी एक अजीब सी सोच थी कि वह अभी सीलपैक माल थी.

आदिरा इंटर्न करने चली गई.
उसके एक हफ्ते बाद मैंने भी आगरा का और उसके आस-पास का एक लम्बा प्रोग्राम बनाया क्योंकि मुझको आदिरा के साथ अपनी फंतासी पूरी करनी थी.

आगरा पहुंच कर पूरा दिन सेल्स मीटिंग में लगाया और शाम को उसको फ़ोन किया, उसका हालचाल पूछा और औपचारिकता निभाई.
तो उसने पूछा- वाह, मेरे शुगर डैडी आगरा आ गए … कहां रुके हैं?

अब चौंकने की मेरी बारी थी- तुमको पता कैसे चला मैं आगरा में हूँ?
आदिरा- अंदाज़ा था कि आप आओगे, पर इतनी जल्दी आओगे … ये नहीं सोचा था!

मैं- तो ये भी पता होगा कि मैं क्यों आया हूँ?
आदिरा- हां, मुझसे मिलने और क्या?
मैं- तुम में ऐसा क्या है, जो मैं इतनी दूर आ जाऊं?

आदिरा- मेरे शुगर डैडी, क्या आपको लगता है कि मेरे में कुछ नहीं है?
आदिरा की दोअर्थी बातों से मेरा भ्रम बढ़ रहा था और साथ ही साथ वह मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा रही थी.

मैं- तो इतनी दूर क्यों हो, आ जाओ मेरे पास … या बताओ कहां हो, मैं आ जाता हूँ.
आदिरा- होटल में ही हूँ और हाफ ऐन ऑवर में फ्री हूँ जाउंगी.

तय समय पर मैंने उसको होटल से उसको पिक किया, फिर सदर में घुमाने ले गया.
उधर उसको सदर बाजार में शॉपिंग भी कराई.

साथ में हमने राजा मंडी में चाट खाई और वहां से संजय पैलेस में स्थित एक बड़े होटल में आ गए जहां मैं रुका था.

रूम में आते ही आदिरा को अपनी ड्रेस निकाल कर अपने जिस्म से लगा लगा कर विशाल शीशे में देखने लगी.
मैं काउच पर बैठा उसकी हरकत को गौर से देख रहा था.

अंत में उसने एक नाईट ड्रेस निकाली गहरे नीले रंग की … जो शायद मुश्किल से उसकी गांड तक ही आती होगी.
उसका गला इतना गहरा कि उसकी चूचियां भी पूरी तरह दिख जाएं.

मैं- इस ड्रेस को कब पहनोगी और किसके अवसर के लिए खरीदा है?
आदिरा- सोचा नहीं, अच्छी लगी तो ले ली. वैसे आपने दिलाई है तो आपको तो पहन कर दिखा ही सकती हूँ.

आदिरा की बात सुन कर मेरा दिल ही हलक में आ गया.
लंड में उबाल सा आ गया.
मैं बस कसमसा कर रह गया.

पर यह तो यकीन हो गया था कि वह मुझे उकसा रही थी और मुझे छेड़ने का मूड बना चुकी है.
मैंने उसको और थोड़ा उकसाने देने की सोची.

तभी आदिरा फिर बोली- शुगर डैडी देखना चाहोगे, जो कुछ आपने मुझको गिफ्ट किया है. वह सब ड्रेस मेरे ऊपर कैसी लगती हैं … मैं कैसी लगूंगी?

मैं- हां हां क्यों नहीं, जरूर दिखाओ … और अगर फिट नहीं हुई, तो कल बदल लेंगे.

आदिरा एक फ्रॉक जैसी फ्यूज़न इंडियन ड्रेस लेकर रेस्टरूम (बाथरूम) में चली गई.

फिर थोड़ी देर में वह बाहर आई.
सच में ड्रेस उसके ऊपर अच्छी लग रही थी.

घुटनों तक की लंबाई की ड्रेस थी जो चूचियों से शुरू होती थी और घुटने तक जाती थी.

दो पतली रस्सियों से ड्रेस उसके कंधे के ऊपर से बांध कर सैट की हुई थी.
फुल ब्राइट रंग के फूलों से भरी ड्रेस!

उस ड्रेस को दिखाने के बाद जब एक नई ड्रेस लेकर जाने लगी … तो मैंने भी उसका मूड जानने के लिए कह दिया- बार बार क्या रेस्टरूम जाओगी, यही चेंज कर लो!

एक पल उसने मेरी तरफ देखा और सोचा, तब तक रूम सर्विस की घंटी बज गई.
क्योंकि मैंने ड्रिंक और मसालेदार भुना चिकन आर्डर किया हुआ था.

रूम सर्विस वाले ने भी आदिरा को नई ड्रेस में प्रशंशा वाली नज़रों से देखा.
हम दोनों की उम्र का इतना डिफरेंस था कि शायद उसको लगा होगा कि बाप बेटी हैं.

आदिरा ड्रेस लेकर कुछ सोच रही थी तो मैं दोनों के लिए ड्रिंक बनाने लगा.
तभी उसने अपनी ड्रेस उतार दी.

एक बार मेरा कलेजा जोर से धड़का क्योंकि मुझे इसकी उम्मीद कम ही थी.

साथियो, अब वक़्त है कि मैं आदिरा के बारे में बता दूँ.

आदिरा लगभग 20 साल की एक अधखिला पुष्प थी.
लम्बाई उसने अच्छी पाई थी … वह यही कोई 5 फुट 5 इंच इंच की थी.

लम्बी टांगें, थोड़ी भरी भरी जांघें.
उसकी 24 इंच की कमर, करीब 30 की चूचियां, 32 के चूतड़ या गांड, कंधे तक बाल, गहरी काली भूरी आंख, खिलता सा गोरा रंग, पतले गुलाबी होंठ, जो सदा मुझे गीले ही दिखाए दिए.
थोड़ी लम्बी गर्दन और उसकी त्वचा एकदम गुलाब की पंखुड़ी सी मुलायम.

आदिरा चलती-फिरती बम जैसी थी.
उसका यौवन मेरे जैसे उम्रदराज़ मर्द का लंड गर्म कर चुका था.

उसकी इस पारदर्शी ड्रेस के अन्दर से झलकती उसकी ब्रा पैंटी, उसका गुलाबी गोरा बदन साफ़ नज़र आ रहा था.

चूत को छिपाती हुई वह एक पट्टी नुमा कपड़ा … जिसको पैंटी कहते हैं, उसमें से चूत का उभार दिख रहा था.

उसकी चूत का फूलापन मुझे बेहद कामुक लग रहा था.

आदिरा की ड्रेस सिर्फ पैंटी को ही ढक रही थी, बाकी गोरा बदन तो मेरी नज़र में था ही.
इसमें कोई शक नहीं था कि आदिरा मेरे साथ सम्भोग को आतुर थी.

मैं कसमसाता सा अभी भी वैसा ही बैठा था सिर्फ ये देखने को कि आदिरा किस हद तक जाएगी.

आदिरा चल कर मेरे पास आई और गोल गोल मेरे सामने घूम कर पूछने लगी- कैसी लगी मेरी ड्रेस … मेरे शुगर डैडी!

उसके घूमने का का नतीजा था कि हवा से ड्रेस उड़ रही थी.
पैंटी और उसमें छुपी चूत के नज़ारे दिख रहे थे.

मेरी आंखों में वासना की लाली उतर आई थी.

चेहरे पर वासना से भरी मुस्कान के साथ मैंने कहा- वाह … बहुत अच्छी है … और तुम बहुत हॉट लग रही हो!
आदिरा- थैंक्स शुगर डैडी.

वह बार बार मुझको शुगर डैडी बोल कर मानो उकसा रही थी.
जैसे कहना चाहती हो कि अब तक जो भी हेल्प की, उसका हर्ज़ाना वसूल लो.

पर मैं इस खेल को और आगे तक खेलना चाह रहा था.
मैं जानबूझ कर अनजान सा बना रहने की कोशिश में था.

मैंने उसको खींच कर अपनी जांघों पर बैठा लिया तो उसने भी अपना हाथ मेरे गले में डाल दिया और मुझसे चिपक कर बैठ गई.

फिर मैंने उसको वाइन पिलाई और उसी गिलास से खुद पी ली.

मैं उसको गोद में बैठाये हुए उसके बदन की कोमलता का लुत्फ़ उठा रहा था और हम दोनों एक ही गिलास से वाइन पी रहे थे.

दो या तीन सिप के बाद आदिरा बोली- क्या शुगर डैडी, अभी तक आपने चेंज भी नहीं किया. जाइए जल्दी से चेंज कीजिए.
यह कह कर वह उठ गई.

मैं उठा और रेस्टरूम में जाकर मैंने ब्रश किया और रूम में आकर अपने कपड़े निकाल कर फिर से रेस्ट रूम जाने के लिए मुड़ा.
फिर ना जाने क्या सोच कर वहीं जाकर रुक गया, जहां आदिरा ड्रेस चेंज कर रही थी.

मुझे रुकते देख कर उसकी आंखों में चमक आ गई.
उसकी आंखें और खुल सी गईं और वह मेरे अगले मूव का इंतज़ार करने लगी.

मैंने कोट उतारा.
फिर उसकी तरफ मुँह करके शर्ट उतार दी.

अन्दर मैं बनियान पहनता नहीं, तो मेरा ऊपरी हिस्सा नग्न था.
मेरी मसल, मेरी बालों से भरी चौड़ी छाती गहरे काले मेरे निप्पल उसके सामने थे.

वह वाइन का सिप लेती हुई मेरे जिस्म को गौर से देख रही थी.
जब आदिरा मेरे सामने अपनी ड्रेस उतार रही थी, तब जैसे मेरी हालत जैसी थी … फिलहाल अभी उसकी भी हालत कुछ वैसी ही हो गई थी.

खैर … अब इस खेल में मुझको भी और मज़ा आने लगा था.

ऐसी कम उम्र की नवयुवतियों को सेक्सुअली आकर्षित करने का मुझको कुछ ज्यादा ही तज़ुर्बा था.

अब वक़्त था इस खेल को अगले पायदान पर ले जाने का!

फिर मैं उसकी तरफ पीठ करके अपना पैंट खोलने लगा, पर मेरी तिरछी नज़र उस पर ही थी.
मेरी इस हरकत से आदिरा की आंखें बड़ी हो गईं. वह स्थिर आंखों से मुझको देखने लगी.

जैसे ही मैंने धीरे से पैंट उतारा, तो उसने अपनी जीभ से सूखते होंठ को गीला करके एक बड़ा सा सिप वाइन का भर लिया.

मैं सिर्फ वी-शेप की जॉकी में उसके सामने था.
आदिरा ने फिर वाइन का बड़ा सिप लिया और मेरी तरफ आंखें बड़ी करके देखती रही.

जॉकी में मेरा लंड हल्की उत्तेजित अवस्था में फूल कर उभार की शक्ल में सामने था.

मेरी भरी हुई जांघें, उस पर घने बाल, जांघों की मसल्स का दिखना, हल्का उभरा हुआ पेट, आदिरा को उत्तेजित करने के लिए पर्याप्त था.

मैं उसको देख कर भी अनदेखा कर रहा था.
अब मैं उसकी तरफ फिर से पीठ करके अपने कपड़े समेटने लगा.

मेरी गठीली चिकनी पीठ, कर्वी कमर उभरे हुए चूतड़, उस पर कसी हुई जॉकी … कुछ ऐसा ही नज़ारा थोड़ी देर पहले मैं आदिरा का देख चुका था.

चूंकि मैं अपने भावों को कंट्रोल कर सकता था, पर मुझे पता था वह अधखिली यौवन से भरपूर अपनी भावनाओं को कंट्रोल नहीं कर पा रही थी.

एक अर्ध नग्न बलिष्ठ गठीले सम्पूर्ण मर्द का जिस्म, उस जैसे अधखिले यौवन की कामवासना को जगाने के काफी होता है.
कुछ ऐसा ही हाल आदिरा का था.

मुझे अच्छे से पता था कि उसकी चूचियों में कसाव बढ़ गया होगा, होंठ सूख चुके थे, पेट में मरोड़ सी उठ रही होगी.
साथ ही साथ चूत भी रिसने लगी होगी.

मैं आराम से अपने अर्ध नग्न जिस्म को उसको दिखा रहा था.
आदिरा बार बार कसमसा कर जांघों को सिकोड़ रही थी, बेचैन निगाहों से मेरी तरफ देख रही थी.

वाइन के बड़े सिप से अपने सूखते गले को तर कर रही थी.
तभी मैंने झुक कर अपना शॉर्ट्स उठाया और उसकी तरफ पीठ करके सिर्फ एक उंगली से अपने जॉकी को नीचे करने लगा.

मैं कुछ ही पल में उसके सामने पूर्ण नग्न था.

कुछ पल को मैं रुका और हल्का तिरछे होकर उस पर एक निगाह डाली.

अब जैसे ही मैं शॉर्ट्स को पहनने जा रहा था तभी …

आदिरा लगभग भाग कर मुझसे आकर लिपट गई और मेरे जिस्म पर मेरी पीठ पर अपने गर्म और थरथराते होंठों रख दिए.
अपने उन्हीं गीले होंठों से वह मेरी पीठ पर चुम्बन करने लगी.

यकीन मानो एक बलिष्ठ मर्द का नग्न का जिस्म किसी भी कमसिन यौवन के जिस्म में वासना की आग जगा सकता है.
आदिरा से अपनी उतेज़ना और काम वासना पर संयम नहीं हुआ.

मुझे यकीन था कि अब तक उसने किसी मर्द इस अवस्था में नहीं देखा होगा.

उस जैसी कमसिन अर्ध विकसित यौवन इससे ज्यादा वियोग बर्दाश्त नहीं कर सकता था.
उसकी चूत, उसका दिल, उसका बदन, उसका दिमाग, सब उसका साथ छोड़ चुके थे.

उसको सिर्फ एक भरपूर नग्न मर्द नज़र आ रहा था और उतेज़ना, उसके पास जाने को मज़बूर कर रही थी.
वही होना था और हुआ भी.

आदिरा सम्मोहित सी भाग कर मेरे पास आकर लिपट गई थी और मेरा लंड उसके बदन से स्पर्श करने लगा था.
दोस्तो, इस शूगर डैडी एंड हॉट गर्ल कहानी को पढ़कर आपको कैसा लगा, प्लीज जरूर बताएं.

शूगर डैडी एंड हॉट गर्ल कहानी का अगला भाग: मस्त लड़की ने मुझे बनाया अपना शूगर डैडी- 1

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