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Hindi Sex Stories – हिंदी सेक्स कहानियाँ

चुदाई भरी एक अनोखी ट्रेन यात्रा


Xxx ट्रेन चुदाई कहानी में मेरा दो दिन का सफर था कन्याकुमारी तक. इस दौरान मुझे मेरे कूपे में मेरी 3 अलग अलग सहयात्री लड़कियां आई. उन लड़कियों से मेरे सम्बन्ध कैसे रहे?

सभी लंड के स्वामी और चूत की रानियों को मेरा नमस्कार।
मेरा नाम आदित्य शुक्ला (बदला हुआ) है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूं.

मैं पेशे से एक शिक्षक हूं और वर्तमान में दिल्ली से बाहर हूं।

मेरी हाईट 5 फुट 8 इंच, रंग गोरा और जिम जाने के कारण कसरती बदन है.
कुल मिला कर कहूं तो ठीक ठाक दिखता हूं।

अब बात करते है उस चीज की जो दिखती नहीं है.
यानि मेरे लंडेश्वर महाराज की!
मेरे लंड की लम्बाई 7.5 इंच और मोटाई 3 इंच है जो किसी भी सामान्य लड़की को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त है।

यह मेरी पहली कहानी है आशा है आप सभी इस Xxx ट्रेन चुदाई कहानी को भरपूर प्यार देंगे।

कहानी आज से 1 साल पहले की है। बात है सितंबर के महीने की जब हल्की बारिश हो रही थी और हम 4 दोस्तों का प्लान कन्याकुमारी घूमने का था.
हम सभी लोग झांसी रेलवे स्टेशन आ चुके थे.
11 बजे हमारी ट्रेन थी जो सीधे हमे कन्याकुमारी तक छोड़ने वाली थी.

2 दिन हम लगातार प्रथम श्रेणी ट्रेन में यात्रा करने वाले थे.

जैसे ही हम लोग ट्रेन में चढ़े कि दिल्ली से एक खूबसूरत अप्सरा पहले से मेरी सीट के सामने वाली सीट पर सफर कर रही थी.
उसे भोपाल जाना था.

बातचीत से पता चला कि उसका नाम सुभांशी (बदला हुआ) था.
वह भोपाल से बीटेक की पढ़ाई कर रही थी और गाजियाबाद की रहने वाली थी।

सुभांशी के फिगर की अगर बात करूं तो बड़ी बड़ी आंखें और सुराहीदार गर्दन के नीचे 32-30-34 का मदमस्त फिगर लिए थी वो!

मेरे दोस्तो की सीट अगले कंपार्टमेंट में थी और मेरी और उसकी अंतिम कूपे में थी।

बातचीत हुई हम दोनों में … और बात बढ़ती गई.
करीब 3 बजे दोपहर में साथ में खाना खाया और कूप लॉक करके लेट गए।

बातों बातों में पता लगा वह सिंगल है और बहुत हंसमुख है.
मैंने भी उसकी तारीफ करी जिससे वह मुझसे आकर्षित होने लगी.

हम अब साथ मेरी सीट में बैठ कर मूवी देखने लगे.
मैंने उस मौके का फायदा उठाया और एक हाथ उसके हाथ में रख दिया।

मेरे हाथ रखने पर उसने कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत और बढ़ी जिससे मैंने उसके हाथ को सहलाना शुरू किया.
जिस पर उसने मुझको पहले तो सवालिया निगाहों से देखा पर बाद में मुस्कुराहट बिखेर दी।

अब मुझे भी ग्रीन सिग्नल मिल गया.
मैंने उसे अपने पास कमर से पकड़ कर खींच लिया और किस करने लगा.

उसके होंठ बहुत पतले और रसीले थे.

उसके होंठों से होते हुए कभी गर्दन तो कभी गाल और कभी उसके कान की लौ को मैं लगातार चूम रहा था.

अब वह भी गर्म हो गई थी और मेरे किस का बराबर से साथ दे रही थी।

धीरे से मैंने एक हाथ उसके चूचे के ऊपर रख दिया और धीरे धीरे उसके चूचे दबाने लगा.
वह मेरे बालों में हाथ डाल कर सिसकारियां निकलने लगी।

“आई लव यू आदित्य! तुम बहुत अच्छे हो. ऐसे ही करते रहो।”

अब मैं सही मौका देखकर बिना नाड़ा खोले धीरे से एक हाथ उसकी पैंटी के अंदर ले जाकर उसकी चूत मसलने लगा।

अब तो वह बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी और मुझे बेतहाशा चूमने लगी।

मुझे समझ आ गया कि लोहा गर्म हो गया है.
मैंने तुरंत अपने और उसके कपड़े उतारे और कंबल के अंदर उसे लेकर चोदना शुरू किया.

सुभांशी बिलकुल वर्जिन थी तो उसको बहुत दर्द हुआ.
लेकिन मेरे होंठ उसके होंठों से लॉक थे जिसके कारण उसकी चीख दबी रह गई.

उसके आंखों से आंसू निकल रहे थे.

मैंने कुछ देर रुके रहना उचित समझा और उसको प्यार से सहलाने लगा.
कुछ देर बाद जब वह सामान्य हुई तो खेल चुदाई का शुरू हुआ.

3 बजे से कब 6 बज गए पता भी नहीं लगा.

उस दिन उसकी 3 राउंड चुदाई की.
फिर एक एक करके टॉयलेट गए और फिर साथ में आकर लेट गए, एक दूसरे को प्यार करते रहे.

10 बजे उसका स्टेशन आ गया और वह उतर गई.
पर जाने से पहले अपना मोबाइल नम्बर और एड्रेस दे गई और अपने इंस्टा में भी एड कर लिया।

खैर भोपाल में उसके उतरने के बाद फिर एक पंजाबन लेडी चढ़ी जो न्यूली मैरिड थी क्योंकि उसके हाथों में पूरे में मेंहदी और चूड़ियां थी।

रात के 11 बज रहे थे और उस बंदी ने विहस्की की बोतल निकाली और एक पैग लगा लिया.

उसने मुझे जगते देखा तो मुझे भी शराब की पेशकश की.
तो मैंने उसे बताया मैं नहीं पीता।

तो उसने एक और पैग लगाया.

अब व्हिस्की का नशा उस पर होने लगा था और वह अब कंबल हटा कर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी.
उसने अपना नाम सिमरन बताया.

और बातों बातों में वह मुझसे डबल मीनिंग बातें करने लगी.

मैं भी उससे मस्ती करते हुए उसकी सुहागरात के बारे में पूछने लगा।

अब वह सुहागरात को याद करते हुए गर्म होने लगी.
तभी सिमरन उतर कर नीचे मेरे पास आकर बैठ गई और रोने लगी और अपना दुख बताने लगी कि कैसे उसकी सुहागरात में भी उसके पति नहीं उसके साथ कुछ नहीं किया।

मै सिमरन (बदला हुआ) के बारे में आपको बताना भूल गया.
सिमरन 25 साल की एक मस्त भरे बदन की पंजाबन माल थी. उसकी कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी.
पर उसका पति किसी और से प्यार करता था जिसके चलते उस पर ध्यान नहीं देता था।

सिमरन का फिगर बिलकुल मेंटेन था. मस्त गोरी चिट्टी लौंडिया थी सिमरन!
फिगर तो ‘ठंड में भी आग लग जाए’ ऐसा था; सिमरन का फिगर 34-28-36 था.
बिल्कुल किसी मॉडल की तरह गुलाबी गाल और बिखरे हुए बाल कहर ढा रहे थे।

उसने बताया कि उसका पति उसको प्यार नहीं करता और रोते रोते वह मेरे सीने लग गई.

मैंने भी उसे जोर से हग कर लिया और उसको चूमने लगा.
मुझे उसके चूचे पसंद आए थे तो सबसे पहले उन पर ही टूट पड़ा और जोर जोर से दबाने लगा।

सिमरन मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी.
जब उससे सब्र न हुआ तो मेरी पैंट उतार कर मेरा लंड चूसने लगी.

अब तो मैं जैसे जन्नत में था.
मैंने उसके बालों को पकड़ कर उसका मुंह चोदना चालू कर दिया और लगातार चोदकर उसके मुंह में ही झड़ गया।
जिसे वह चाट कर साफ कर गई।

सिमरन लंड बहुत मस्त चूसती थी.
उसका राज उसने बाद में बताया कि उसका कॉलेज कई लड़कों से चक्कर था।
सिमरन एक नंबर की चुदक्कड़ माल थी।

अब धीरे से उसकी चुदाई चालू की.

हमने अपने कूपे की बत्ती बुझा दी और चुदाई का दौर शुरू हुआ.

कभी मैं सिमरन के ऊपर कभी वह मेरे ऊपर!
तो कभी डॉगी स्टाइल में तो कभी एक टांग उठा के बर्थ में खड़े खड़े!
जितनी भी पोजिशन संभव थी सभी ट्राई की।

और इस रात सिमरन को दो बार चोदा जब दोनों की हिम्मत ने जवाब दे दिया।

लगातार Xxx ट्रेन चुदाई से मुझे बुखार सा हो गया था.
मैंने तुरंत एक पैरासिटामोल ली और 3 केले खुद खाएं और 2 सिमरन को खिलाए और सो गए.

11 बजे से 3 बजे तक चली चुदाई में कब नींद आई पता नहीं चला.
नींद तब खुली जब सिमरन ने मुझे जगाया और बोली कि उसका स्टेशन आने वाला है.

उसने जोर से चुम्बन किया और दोबारा मिलने का वादा किया।
अपना कॉन्टैक्ट देकर वह विजयवाड़ा स्टेशन पर उतर गई।

सिमरन के जाने के बाद मैं फिर सो गया और दोपहर में 1 बजे जगा.

लगातार चुदाई के चलते बहुत कमजोरी का अहसास हो रहा था तो मैंने अपने दोस्त को फोन लगा कर बताया की तबीयत सही नहीं लग रही है, कमजोरी सी है.
तो वह कुछ फल लेकर दे गया और बैठ कर कुछ देर बातें की.

फिर चेन्नई एनमोर में ट्रेन 1 घंटे सफाई के लिए रुकने वाली थी तो हम दोनों बाहर आकर टहलने लगे.
बाहर जूस पिया और वेज बिरयानी खाई और ट्रेन में वापस आ गए।

वापस आकर देखा कि 2 लड़कियां बुरके में हमारे कूपे में बैठी थी.
बात करने में पता लगा एक लड़की की मेरे ऊपर की सीट है, दूसरी उसे छोड़ने आई है।

जब ट्रेन चलने को हुई तो दूसरी लड़की उतर गई और मेरे ऊपर की सीट में फिर एक माल आ गया।

ट्रेन में शुरू में तो वह बुर्के में थी पर बाद में वह शॉर्ट्स पहन कर टॉयलेट से आई.

मैंने जब उसे शॉर्ट्स में देखा तो कसम से देखता ही रह गया.
मेरा लंड जो पिछले 24 घंटे में कई राउंड चुदाई कर चुका था, फिर से सलामी देने लगा.

अब मैंने भी मन लगा लिया कि इस बुर वाली को चोद कर ही दम लूंगा।

ट्रेन चलने लगी थी.
मैंने सामान्य बातचीत में उसका नाम वगेरा और प्रोफेशन पूछा।
जिसके जवाब में उसने अपना नाम जिकरा (बदला हुआ) बताया और वह एक जिम स्ट्रक्टर थी।
तभी उसका फिगर बिलकुल फिट था, पतली कमर निकली हुई गांड़ और तने हुए सख्त चूचे।

30-26-32 के फिगर की मालकिन कुछ ज्यादा ही अपने आप पर इतरा रही थी शुरुआत में!
लेकिन धीरे धीरे उसने भी लाइन देनी शुरू कर दी।

थोड़ी देर बाद मैं दोस्त के पास जाने के लिए उठा और दोस्त के पास होकर आया.
तो भी इसी बीच टॉयलेट से आई थी.

मैंने कूपे का दरवाजा खोला था कि वह पलट गई और मैं उसके सीने से लग गया।

मुझे तो मानो जन्नत का मजा मिल गया था, उसकी चिकनी कमर में मेरा हाथ था।

मैं और वह एक दूसरे की आंखों में देखे जा रहे थे।

मुझसे अब कंट्रोल नहीं हुआ तो मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जीभर कर उनका स्वाद चखने लगा.
थोड़े नखरे के बाद वह भी मेरा साथ देने लगी.

मैंने चुम्बन करते करते उसकी गांड को शॉर्ट्स के बाहर से मसल दिया जिस पर वह चिहुंक उठी.

मैंने अगले ही पल उसके शॉर्ट को उसके बदन से अलग कर दिया.

इससे पहले वह कुछ करती, मैंने धक्का देकर उसे अपनी सीट पर लिटा दिया और एक हाथ से चूचे मसलने लगा और दूसरे से उसकी गांड सहलाने लगा।
ज्यादा देर न करते हुए मैंने उसकी चूत में लंड घुसा दिया और चुदाई की शुरुआत की।

जिकरा की गांड बहुत मस्त थी.
मैंने मन बना लिया था आज इसकी गांड जरूर मारूंगा।

जिकरा की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद हम दोनों साथ में लेट गए और एक दूसरे को सहलाने लगे.
सहलाते हुए मैं उसकी गांड में भी उंगली कर रहा था जिससे उसे आभास हो चला था कि उसकी गांड भी फटने वाली है.

वह अचानक से पलट गई और गांड मरवाने से मना करने लगी।

मैंने कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है तो मारनी है.
जिस पर वह मेरा लंड चूसते हुए मुझे मनाने लगी और कहने लगी- यार, चूत में तो तुम्हारा लंड लेने में हालत खराब हो गई. गांड में लूंगी तो मैं मर जाऊंगी।

लेकिन काफी समझाने के बाद वह मान गई और उसने अपनी गांड दे दी.

दोपहर से लेकर अगली सुबह 4 बजे तक कई राउंड की चुदाई और हुई जिकरा का रोम रोम खिल उठा।
जिकरा ने अपने फ्लैट में रुकने के लिए कहा.

लेकिन मेरे साथ दोस्त थे जिसके कारण मैंने मना कर दिया.

मैं 4 दिन कन्याकुमारी रुका और 4 के 4 दिन रोज रात में जिकरा के साथ Xxx ट्रेन चुदाई के मजे किए।
और जिकरा के साथ लक्ष्यद्वीप चलने का वादा देकर लौट आया।

उसके बाद क्या हुआ … जानने के लिए जुड़े रहिए।

इसके आगे की कहानी फिर कभी।
तब तक के लिए सभी को धन्यवाद।

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